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मछली बीज से कमा रहे लाखों रुपये, दूसरों को दे रहे रोजगार

Earning millions from fish seed,Giving jobs to others

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लोहरदगा : सपनों के पर होते तो हैं और वे उड़ान भरते हैं, ये कहावत तो बहुत पुरानी है लेकिन सपने तैरते भी हैं ये साबित कर दिया मनातु गाँव निवासी 50 वर्षीय लाल जयकुमार नाथ शाहदेव ने। अपने परिवेश की अच्छी पड़ताल के बाद आज वह मछली पालन कर सालाना लाखों रुपए कमाते हैं और कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। जयकुमार शाहदेव का जीवन जैसा आज है उसकी कल्पना उन्होंने खुद भी नहीं की थी। माइनिंग का कोर्स कर बेरोज़गारी की ज़िन्दगी गुज़ार रहे जय बताते हैं कि उनका जन्म भले ही एक संपन्न घर में हुआ पर उनकी आर्थिक हालत विपन्नता के बेहद करीब थी। दो वर्षों तक सिकनी कोलियरी में प्राइवेट नौकरी की लेकिन यहां इनका मन नही रम पाया। इस नौकरी से परिवार को दो वक्त की रोटी का जुगाड़ मुश्किल हो रहा था। बहरहाल, इसी परिस्थिति में इन्हें मत्स्य पालन के कारोबार ने आकर्षित किया। बचपन से मछली पालन का शौक भी था, तो इसकी शुरुआत उन्होंने वर्ष 2011 में घर के तालाब में पछली पालन से कर दी। वह रोज घंटों तक मछली पालकों के संपर्क में रहते और बारीकी से हर काम को देखकर आत्मसात करते। इस दौरान इन्होंने रांची और हैदराबाद में प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। कुशल प्रशिक्षकों के सानिध्य में उन्होंने पछली पालन से जुड़ा सारा काम सीख लिया। प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने पांच तालाब पट्टे पर लेकर मछली पालन का काम शुरु कर दिया, जिससे उनकी आमदनी बढ़ने लगी, लेकिन उनकी आमदनी का एक बड़ा हिस्सा तालाब की किस्त अदायगी में ही चला जाता था, लेकिन ये अपनी मेहनत और लगन से मुंह नहीं मोड़ा। उनकी इस लगन को देखते हुए लातेहार मत्स्य विभाग ने वर्ष 2019 में शत प्रतिशत अनुदान देकर गांव में ही एक हैचरी का निर्माण करा दिया, जिसका नाम जय ने मां मत्स्य हैचरी रखा है, जहाँ उन्नत नवीन प्रजाति के रेहु, कतला, ग्रास कार्प, मृगल प्रजाति के बीज उत्पादन कर इसकी आपूर्ति लोहरदगा, लातेहार, रांची सहित अन्य पड़ोसी जिलो में करते हैं। कुछ बेहतर करने की चाहत में कड़ी मेहनत से आज सिर्फ अपनी दशा ही नहीं बदली, बल्कि आसपास के किसानो की भी जिन्दगी बदलने का कार्य कर रहे हैं। जय बताते हैं कि पहले यहां के किसानो को बीज के लिये पश्चिम बंगाल व अन्य राज्यों से आये दूसरे और तीसरे ब्रीड के मत्स्य बीज पर निर्भर रहना पड़ता था वो भी सही बीज नहीं मिल पाता था, जिससे यहां के किसान मछली उत्पादन में काफी पीछे रहते थे, उत्पादन कम होने से किसानों का मनोबल भी गिर रहा था।

दूसरों के लिए प्रेरणा बने जयकुमार

जयकुमार दूसरे मछली पालकों को भी प्रशिक्षण देने का काम करते है,

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आज किसान उनसे फोन पर इस पेशे से सम्बंधित सलाह-मशविरा लेते हैं। जिन्हें ये निसंकोच और निस्वार्थ भाव से आदरपूर्वक सही जानकारी भी देते है। कोरोना काल में जब सभी तरह के सरकारी प्रशिक्षण बन्द पड़े थे तब भी उन्होंने चंदवा प्रखंड ढोठी माल्हण के किसानो को प्रशिक्षित किया साथ ही फिल्ड में घूम घूम कर किसानो को मत्स्य पालन के लिए तकनीकी जानकारी प्रदान कराते रहे। यही वजह है कि आज माँ मत्स्य हैचरी के सफल संचालन से प्रेरणा लेकर लोहरदगा, लातेहार जिले में सैकड़ों युवा मत्स्य पालन के क्षेत्र में उतरने की तयारी में है, वे कहते हैं कि स्वरोजगार के इच्छुक लोगों के लिए मछली पालन में असीम संभावनाएं हैं। खास बात यह है कि मत्स्य विभाग इच्छुक लोगों को मछलीपालन में ट्रेंड कर उन्हें इस उद्योग की स्थापना के लिए विभागीय नियमानुसार अनुदान भी दे रहा है। इसलिए खेती और अन्य व्यवसाय से नुक्सान उठा रहे लोग मत्स्य पालन से जुड़कर अपनी गरीबी की जंजीर काट सकते हैं। उनका सपना है कि यहां के युवा मछली पालन से जुड़कर आत्मनिर्भर बने।

 

रिपोर्ट- क्यूम खान

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