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ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर कोरोना का असर, घरों में पढ़ी गई नमाज

Effect of corona on Eid-ul-Azha (Bakrid),

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लोहरदगा : इस्लामिक कैलेंडर के अंतिम माह में आयोजित होने वाला ‘ईद उल अजहा’ (बकरीद) का त्‍योहार कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण व लॉकडाउन के बीच शनिवार को शांति व सौहार्द के साथ शारीरिक दूरी के नियम का पालन करते हुए मनया जा रहा है। इस अवसर पर लोहरदगा जिले के नगरपालिका क्षेत्र समेत किसी भी ईदगाह व मस्जिद में ईद उल अजहा की नमाज नहीं पढ़ी गई। लोगों ने अपने-अपने घरों में फज्र की नमाज अदा कीं। इसके बाद नए कपड़े पहने और घरों में ही चाश्त की चार रकात नामाजें अदा कीं। कोरोना वायरस के मद्देनजर मुस्लिम धर्मावलंबियों ने भी सरकारी निर्देशों का पालन करते हुए अपने-अपने-अपने घरों में ही ईद की नमाज अदा कर एकता का परिचय दिया। कोरोना वायरस को खत्म करने के लिए हम सब एकजुट हैं और हम सरकार के फैसले के साथ हैं। पूरे परिवार के साथ नमाज अदा करते हुए अल्लाह ताला से जिला समेत देश में शांति, सौहार्द और समृद्धि की दुआएं की गई। साथ ही अल्लाह से फरियाद की गई कि पूरा देश कोरोना मुक्त हो और भारत की जीत हो।

संकट काल में घर पर ही बकरीद की रही धूम

विदित हो कि लोहरदगा समेत पूरा राज्य कोरोना वायरस संक्रमण से जूझ रहा है। संक्रमण से बचाव के लिए कुछ छूटों के साथ 31 अगस्त तक पुन: लॉकडाउन घोषित किया गया है। इसके लिए शारीरिक दूरी का पालन भी जरूरी है। इसका असर पर्व-त्‍योहार पर भी पड़ा है। संकटकाल में त्‍योहारों की धूमधाम खत्‍म हो गई है। आज बकरीद के अवसर भी ऐसा देखने को मिल रहा है। ईदगाहों व मस्जिदों में नमाज अदा नहीं की गई। लोगों ने घरों मे ही नमाज पढ़ी।

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रिपोर्ट : कयूम खान

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