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पाँच दिवसीय योग शिविर का समापन

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सीतामढ़ी-  जिलेे के सुरसंड प्रखंड  में पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के तत्वाधान में निःशुल्क पाँच दिवसीय योग शिविर का समापन हो गया । इस मौके पर योगाचार्य रितेश ने कहा कि योग हमारी वैदिक परंपरा में प्राचीन काल से ही मानव के विकास के लिए एक अति विशिष्ट स्थान दल है। हमारे पूर्वजों के पास इतना बौद्धिक सामर्थ्य था कि जिन्होंने धार्मिक आर्थिक राजनैतिक व सामाजिक क्षेत्र में बड़ा कार्य किए। वे सभी योगी थे मेधा संपन्न थे ।उनके इन श्रेष्ठ कार्यों के पीछे योग का ही प्रताप था उनके पास ज्ञान का अतुलनीय बल तो था पर ही उसके साथ-साथ उसके पास दिव्य चेतना (डिवाइन कॉन्शसनेस ) का भी विशेष बल था।

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उनका जीवन दिव्यताओ से परिपूर्ण था वह योग के अभ्यासी होने के साथ-साथ श्रे्ठ ब्रतो के अभ्यासी थे और इन्हीं व्रतों से उनके ज्ञान को उनके सामर्थ तथा उनकी प्रतिभाओं को एक सकारात्मक दिशा मिली और दिव्यताओ से होकर ज्ञान जब एक निश्चित दिशा में लगता है तो उसके श्रेष्ठ व विराट परिणाम सम्मुख आते हैं यह व्रत ही वह तत्व है जिसकी कमी से उच्च शिक्षा प्राप्त करके भी व्यक्ति अधम पाप कर्म कर्म में प्रवृत्त हो जाता है और यही वह तत्व है जिसकी बोलता से व्यक्ति मानव से महामानव नर से नारायण जीव से ब्रह्म व पुरुष से महापुरुष बन जाता है और अपने जीवन के प्रयोजन को सिद्ध कर लेता है ।हम कुछ भी कर रहे हैं तो वह जीवन में भाव के आधार पर और वे भाव तभी सकारात्मक होंगे जो हमारे अभ्यास पवित्र होंगे।मौके पर मनोज राय, कृष्ना देवी, शांति देवी, सीता देवी, अमित, विवेक व अन्य लोग मौजूद थे।

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