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निरसा में झारखंड पश्चिम बंगाल बॉर्डर को किया गया सील, लोगों को हो रही है परेशानी

Jharkhand West Bengal border sealed in Nirsa, people are facing problems

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निरसा : कोविड 19 के रोकथाम के लिए चलाई जा रही अभियान लोगों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। जिला प्रशासन के आदेश के बाद झारखंड पश्चिम बंगाल सीमा को पूरी तरह से सील कर दिया गया है, जिससे लोगों को काफी समस्यायों का सामना करना पड़ रहा है। झारखंड सरकार को खुफिया जानकारी मिली थी कि पड़ोसी राज्यों से आने जाने वाले विजीटर्स से कोरोना महामारी ज्यादा फैल रहा है जिसके मद्देनजर झारखंड सरकार ने फैसला लिया था कि राज्य के अंदर प्रवेश करने वाले को ई-पास अनिवार्य है और जो ई-पास के सहारे झारखंड में प्रवेश कर रहे है उनको 14 दिन के लिए होम क्वारंटाइन रहना अनिवार्य है। इस आदेश के बाद झारखंड में लोगों का प्रवेश कम हो गया था लेकिन आनन-फानन ने बॉर्डर को पूरी तरह से सील कर दिया गया, हालांकि डीडीसी ने बताया कि सरकार के गाइडलाइन के अनुसार ही काम किया जा रहा है जो ई-पास के माध्यम से आना जाना चाहते है उनको कोई दिक्कत नहीं होगी।

तीन सीमा सील और एक सीमा में छूट

निरसा में झारखंड पश्चिम बंगाल के चार सीमा लगते है जिसमें से तीन सीमा को पूरी तरह से सील और एक सीमा में छूट दिया गया है । चिरकुंडा थाना अंतर्गत पड़ने वाले बॉर्डर से काफी लोगों का आना जाना रहता था क्योंकि झारखंड के लोग बराकर के बाजार पर ज्यादा निर्भर थे और सीमावर्ती क्षेत्र के व्यापारियों का भी दोनों राज्यों में व्यापार है जिसके कारण उन्हें बॉर्डर क्रॉस करना पड़ता था। इन सब के बीच ज्यादा परेशानी उन कामगारों को हो रही है जो ड्यूटी करने के लिए रोज एक दूसरे की सीमा में प्रवेश करते थे सीमा को सील करने के बाद उन लोगों के सामने रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है।

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झारखंड पश्चिम बंगाल बॉर्डर के सील होने से लोग परेशान

स्थानीय पार्षद और नेताओं की माने तो जो व्यवस्था पहले से थी उसे ही लागू करना चाहिए, साथ में प्रशासन को आने-जाने वाले राहगीरों की टेस्टिंग की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि जो लोग बंगाल से झारखंड के सीमा में प्रवेश कर रहे हैं उनकी स्कैनिंग की जाय, स्कैनिंग में जो लोग संदिग्ध पाए जाते हैं उनको झारखंड आने से रोका जा सके। स्थानीय नेताओं ने कहा की दैनिक मजदूरी करने वाले सैकड़ों कामगार रोजाना एक दूसरे राज्य में प्रवेश करते हैं ताकि इस लॉकडाउन का मार झेल रहे कामगार इससे उबर सके और 2 जून की रोटी की जुगाड़ कर सके लेकिन जिला प्रशासन के इस फरमान के बाद उन सबके सामने रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है इसका मार कामगार के साथ-साथ रिक्शा चालक ऑटो चालक भी झेल रहे हैं।

रिपोर्ट :- समामा औसाल

 

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