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सामूहिक सहभागिता से कुपोषण होगा खत्म, चर्चा में कई Doctor शामिल

यूनिसेफ (UNICEF) के न्यूट्रिशन विशेषज्ञ (Doctor) रवि नारायण पाड़ी ने कहा बिहार में कुपोषित बच्चों की संख्या 61 लाख है जिसमें 42% नाटापन, 37% अल्पवजन एवं 14% दुबलापन के शिकार हैं। सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी कुपोषण को ख़त्म करने की कई चुनौतियाँ सामने आती रही है। इसको ध्यान में रखते हुए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कुपोषण से लड़ने के लिए मार्च 2018 में पोषण अभियान की शुरुआत की।

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पटनाः- राजधानी पटना में 7 दिसंबर को इंडियन डाइटेटिक एसोसिएशन (IDA) ने शहर के एक होटल में दो दिवसीय नेशनल सेमिनार न्यूट्री उत्सव का आयोजन किया। इस मौके पर कई विशेषक चिकित्सक (Doctor) मौजूद रहे। इस सेमिनार का उद्घाटन केन्द्रीय राज्यमंत्री स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे (Ashwini Kumar choubey) ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर अश्विनी चौबे ने कहा कुपोषण हमारे समाज के लिए एक बड़ा अभिशाप है। इससे निज़ात पाने के लिए सामूहिक सहभागिता को बढ़ावा देना होगा। एक कुपोषित माता कुपोषित शिशु की जननी होती है और इस तरह कुपोषण का चक्र पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है। देश के साथ राज्य में भी शिशु मृत्यु दर और बाल कुपोषण में कमी लाना एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए बालिका और माता के कुपोषण में वांछित कमी लाना जरूरी है। उन्होंने कहा हर मौसम में उचित, संतुलित और सही मात्रा में भोजन लेना जरुरी होता है, जिसमें डाइटएसीयंस की भूमिका अहम होती है। राज्य के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों (Private Hospital) में इनकी नियुक्ति होनी चाहिए। राज्य सरकार को इसके लिए अपनी तरफ से निवेदन करना होगा।

बिहार में 61 लाख बच्चे हैं कुपोषित

यूनिसेफ (UNICEF) के न्यूट्रिशन विशेषज्ञ (Doctor) रवि नारायण पाड़ी ने कहा बिहार में कुपोषित बच्चों की संख्या 61 लाख है जिसमें 42% नाटापन, 37% अल्पवजन एवं 14% दुबलापन के शिकार हैं। सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी कुपोषण को ख़त्म करने की कई चुनौतियाँ सामने आती रही है। इसको ध्यान में रखते हुए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कुपोषण से लड़ने के लिए मार्च 2018 में पोषण अभियान की शुरुआत की। जिसका उद्देश्य वर्ष 2022 तक 6 साल की आयु के बच्चों में कुपोषण का स्तर 38.4 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पिछले दस वर्षों में बिहार में बौनापन में कमी आई है। बिहार में वर्ष 2006 में बौनापन 56 प्रतिशत था, जो वर्ष 2016 में घटकर 48 प्रतिशत हो गया है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पोषण अभियान अहम भूमिका अदा कर रहा है। साथ ही पोषण माह का आयोजन लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहयोगी साबित हो रहा है।

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कुपोषण दूर करने के लिये सरकार प्रतिबद्ध

पोषण अभियान वर्ल्ड बैंक के कंसल्टेंट (Doctor) डॉ. मन्त्रेश्वर झा ने बताया कि राज्य से कुपोषण को दूर करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। कुपोषण को जड़ से ख़त्म करने लिए 12 विभाग मिलकर पोषण अभियान में सहयोग कर रहे हैं। आईडीए बिहार चैप्टर के सचिव डॉ. मनोज कुमार ने बताया इस दो दिवसीय सेमिनार के माध्यम से बेहतर पोषण से कैसे स्वस्थ रह सकते हैं, इस विषय पर वैज्ञानिक सत्रों के माध्यम से चर्चा की गयी ताकि एक स्वस्थ्य समाज में पोषण विशेषज्ञ अपना योगदान दे सकें। सेमिनार में पोषण के कई आयाम पर विचार कर पोषण से वर्तमान जीवन शैली में स्वस्थ रहने के लिए कई जानकारियां दी गयी। उन्होंने बताया यह सेमिनार राज्य में कुपोषण और अन्य गैर संचारी रोग के प्रति जागरूकता के लिए बहुत ही लाभदायक सिद्ध होगा। सेमिनार में राष्ट्रीय स्तर के पोषण विशेषज्ञ, चिकित्सक स्पीकर के रूप में भाग लिया। कार्यक्रम में राज्य के अलावा विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।

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