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क्षमता से 60 हजार अधिक कैदी बंद हैं जेलों में

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देश की विभिन्न जेलों में क्षमता से लगभग 60 हजार अधिक कैदी बंद हैं।विधि और न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों के बंद होने से संबंधित सवाल के जवाब में आज राज्यसभा को बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के वर्ष 2017 के आंकड़ों के अनुसार जेलों की क्षमता 3 लाख 91 हजार 574 कैदियों की है जबकि इनमें 4 लाख 50 हजार 696 कैदी बंद हैं और यह दर 115.1 फीसदी है।

उन्होंने कहा कि जेल और कैदी राज्यों से संबंधित विषय हैं लेकिन इस समस्या के समाधान के लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों को परामर्श जारी कर सभी विचाराधीन कैदियों को मुफ्त कानूनी सलाह देने और लोक अदालतों का गठन करने को कहा है जिससे उनके मामलों की तेजी से समीक्षा की जा सके। उन्होंने कहा कि जिन विचाराधीन पुरूष कैदियों ने संबंधित मामले में निर्दिष्ट सजा की आधी अवधि पूरी कर ली है उन्हें रिहा करने के लिए उनकी मामलों की समीक्षा की जानी चाहिए जिससे कि जेलों में कैदियों का बोझ कम हो सके।

श्री प्रसाद ने कहा कि जिन विचाराधीन महिला कैदियों ने संंबंधित मामले में निर्दिष्ट सजा की 25 फीसदी अवधि पूरी कर ली है उनके मामलों की भी समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं के साथ बच्चा भी जेल में बंद है उन मामलों पर विशेष ध्यान दिये जाने की जरूरत है। सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को पत्र लिखकर कहा गया है कि वे जिला न्यायाधीशों को भी इन मामलों की प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा करने को कहें।

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