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नालंदा विवि ग्लोबल विवि के रूप में स्थापित होगा: प्रो.सुनैना सिंह

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 राकेश कुमार की रिपोर्ट

नालंदा :- पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का सपना एक वर्ष के भीतर पूरा हो जाएगा। प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के तर्ज पर राजगीर के पिलखी में बन रहे अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय फिर एक बार देश दुनिया को न केवल ज्ञान का संदेश देगा बल्कि विश्व में पर्यावरण और जल संरक्षण की दिशा में मॉडल के रूप में उभरकर आएगा।

इस विश्वविद्यालय में देश दुनिया चल रहे विवादों का कैसे समाधान किया जाए इसके ऊपर भी रिसर्च किया जाएगा। भारत में ही दुनिया का पहला विश्वविद्यालय खुला था, जिसे नालंदा विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है। प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना गुप्त काल के दौरान पांचवीं सदी में हुई थी, लेकिन सन् 1193 में आक्रमण के बाद इसे नस्ट कर दिया गया था।उसी की तर्ज पर इस विश्वविधलय का निर्माण कराया जा रहा है | करीब 455 एकड़ विशाल भूमि में बन रहे इस विश्वविद्यालय में छात्रावास आवास से लेकर एक सौ भवनों का निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा की अमेेरिका मेें भी नेेट जीरो भवन बनाया गया हैै लेेकिन नालंदा विवि की तरह नहीं है। इस विवि का पूरा भवन ही नेेट जीरोे हैै।

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विवि परिसर के झील से निकाली जाने वाली मिंट्टी से ईंट का निर्माण कर उसे भवन निर्माण में लगाया जाएगा। यह ईंट काम्प्रेसिव अर्थ लॉक सिस्टम से बनाया गया हैै । वहीं रैन हार्वेस¨टग सिस्टम से यहां जल भंडारण, बायो गैस व बायो फिल तथा अपने विवि परिसर में प्राकृतिक स्त्रोत से बिजली का निर्माण किया जा रहा है। जिससे विभिन्न उर्जा की स्वयं निर्माण कर विवि आत्मनिर्भर रहेगी।

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफ़ेसर सुनैना सिंह ने बताया की जब मैंने पदभार संभाला था तो उस समय 0.3 प्रतिशत काम शुरू हुआ था। मेेरा सकंल्प ही था कि जब तक नए परिसर में पढा़ई शुरू नहीं हो जाती तब तक मीडिया के सामने नहीं आउंगी। चुकी आज नालंदा विवि ने अपने संकल्प को पूरा करने लगा तोे लगा कि मुझे मीडिया के साथ विकास कार्योें की चर्चा होनी चाहिए। आज भी 60 प्रतिशत विदेशी छात्र विवि मेें पढ़ाई कर रहे हैे जिनमे लड़कियों की संख्या अधिक है । आसान इंडिया नेटवर्क ऑफ यूनिवर्सिटीज के तहत नालंदा विवि नोडल संस्थान होने के कारण एमईए लागू करने तथा नए अनुसंधान केन्द्र खोलने की मंजूरी मिल चुकी है।

यह विवि अपने आप में अनूठा है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय संबंध व शाति के लिए इसे एक प्रयोेगशाला के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम चल रहा हैै। उन्होंनेे कहा कि यह विवि विश्व के तमाम विवादोें केे निपटारा का केंद्र बन सके,इसके लिए यह बातविवाद से अच्छा है कि इसे एक प्रयोगशाला के रूप में तैयार किया जाये |

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