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एनआरसी, सीएए और एनपीआर दो सोच के बीच की लड़ाई हैः कन्हैया

एनआरसी, सीएए और एनपीआर की लड़ाई किसी एक व्यक्ति को नेता और एमएलए, एमपी बनाने की लड़ाई नहीं है यह लड़ाई दो सोच के बीच की लड़ाई है। जिसमें स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेकर देश को गुलामी की जंजीर से मुक्त करा कर जेल गये, दूसरे तरफ अंग्रेजों की मुखबिरि और चापलुसी कर देश की गद्दी पर बैठ देश को बांटने का काम कर रहे हैं।

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सुरेश राय के साथ रंजीत की रिपोर्ट

नवादाः- एनआरसी, सीएए और एनपीआर की लड़ाई किसी एक व्यक्ति को नेता और एमएलए, एमपी बनाने की लड़ाई नहीं है यह लड़ाई दो सोच के बीच की लड़ाई है। जिसमें स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लेकर देश को गुलामी की जंजीर से मुक्त करा कर जेल गये, दूसरे तरफ अंग्रेजों की मुखबिरि और चापलुसी कर देश की गद्दी पर बैठ देश को बांटने का काम कर रहे हैं। संविधान को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। लोकतंत्र खतरे में है, लोकतंत्र बचाने, संविधान बचाने और देश बचाने के लिए हमलोगों को आगे आना होगा। उक्त बाते सोमवार को आईटीआई के मैदान में जन गण मन यात्रा को सम्बोधित करते हुए सीपीआई नेता कन्हैया कुमार ने कही।

आईटीआई के मैदान में कन्हैया को सुनने आये जनसैलाव को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह लड़ाई असली और नकली की है। वर्ष 1947 में आजाद हुए भारत देश का कानून वर्ष 1950 में लागू किया गया। 2014 के पहले डाॅ भीमराव अम्बेडकर द्वारा बनाये गये कानून को कभी छेड़छाड़ नहीं किया गया। लेकिन 2014 के बाद इस कानून में कई बार संशोधन किया गया। इस कानून के साथ कई बार छेड़छाड़ किया गया। उन्होंने कहा कि भारत की कानून को देश ही नहीं बल्कि विश्व के किसी भी देश से आने वाले लोगों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है। लेकिन आज देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने नागरिकता देने के लिए देश में एनआरसी, सीएए और एनपीआर जैसे कानून बनाकर दूसरे देश से आने वाले लोगों को नागरिकता देने की बात करते हैं, लेकिन वास्तविकता कुछ और है।

असम के लोगों ने एनआरसी की मांग किया था। जब असम में एनआरसी लागू किया गया तब वहां के 19 लाख लोगों को एनआरसी से नाम काट दिया गया जिसमें 15 लाख गैर मुस्लिम समुदाय के लोग है। उन्होंने कहा कि आज इस काला कानून के खिलाफ देश की महिलाएं एक हाथ में बच्चा तो दूसरे हाथ में तिरंगा लेकर सड़क पर उतर गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि जिसे परिवार का ज्ञान ही नहीं है वह परिवार की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले पीढ़ियों के लिए एनआरसी के खिलाफ हमलोगों को लड़ाई लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि हमारा देश हमारा संविधान बापू धाम से गांधी मैदान का नारा देकर जन गन मन यात्रा के तहत नवादा पहुंचे है। इस यात्रा का अंतिम पड़ाव गांधी मैदान होगा।

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उन्होंने लोगों से इस लड़ाई के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए 28 फरवरी को पटना आने का आह्वान किया। कन्हैया कुमार ने पकरीबरावां इंटर विद्यालय के मैदान तथा लगभग एक माह से एनआरसी, सीएए और एनपीआर के खिलाफ पार नवादा के बुंदेलबाग में चल रहे अनिश्चितकालीन धरना स्थल पर पहुंच लोगा को सम्बोधित किया। सभा को कटिहार के कदवा विधायक डाॅ शकील अहमद खान, काॅग्रेस के जिलाध्यक्ष आभा देवी, सीपीआई के जिला सचिव प्रो जयनंदन प्रसाद तथा मसीहउद्दीन समेत अन्य लोगों ने सम्बोधित किया। मौके पर पूर्व विधायक सीपीएम के वयोवृद्ध नेता गणेश शंकर विद्यार्थी, सीपीएम के जिला सचिव प्रो नरेश चन्द्र शर्मा, गोविंद प्रसाद, राजेन्द्र मांझी, अर्जून सिंह, जनार्दन सिंह, भोला राम, माले के जिला सचिव नरेन्द्र प्रसाद सिंह तथा ललन सिंह समेत हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे।

किसान किसानी करना नहीं चाहते, उनके द्वारा उपजाये गये अनाज और सब्जी को मंडी तक पहुंचाने के लिए पैसे नहीं मिलते। जिसके कारण पिछले वर्ष 12 हजार किसान आत्म हत्या कर लिये। जमींनदारी उन्मूलन की लड़ाई लड़ने वाले स्वामी सहंजानंद सरस्वती ने नारा दिया था कमाने वाला खायेगा लेकिन आज ठीक उसका उल्टा हो रहा है। उन्होंने कहा कि किसान खुन पसीना बहाकर खेत में अनाज उपजाते हैं, उस पैसे से अपने बेटो को इंजीनियर की पढ़ाई करवाते है, लेकिन उन्हें नौकरी नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि राजनीत करने वाले बाप अपने बेटे को एमएलए और एमपी तथा बीसीसीआई चेयरमैन बना देते है। लेकिन किसान कभी अपने बेटे को एमएलए, एमपी और बीसीसीआई का चेयरमैन बनाने का सपना भी नहीं देखते। अपने पेट को भूखा रखकर किसान बेटे को पढ़ाते हैं। जब किसी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए जाते है तब उन्हें पता चलता है कि प्रश्नपत्र लिक हो गया। उन्होंने कहा कि राजनीत करने वाले लोगों के बेटे को ही नौकरी मिलती है, किसान के बेटे को नहीं।

कन्हैया कुमार ने केन्द्र सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि देश के सरकारी संस्थान बेचने की साजिश चल रही है। लेकिन जीयो का नेट बीएसएनएल (BSNL) से महंगा होने के बाद भी पूरे देश में दना दन चल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों को ठेके पर दिया जा रहा है। अब सीआईएसएफ में भी 1 लाख युवकों की बहाली ठेके पर होगी। उन्होंने कहा कि महज 5 हजार रूपये की नौकरी के लिए बिहार के लोग दूसरे प्रदेश जा रहे हैं। अगर बिहार में कल कारखाने लगा दिया जाय तब घर का बेटा घर में ही नौकरी कर अपने परिवार को खुश रख सकता है।

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