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संस्कृत व्याकरण के प्रकाण्ड विद्वान हैं पंडित सीताराम शास्त्री, जिनके आँगन में फलफूल रही ‘संस्कृत’

Pandit Sitaram Shastri is a learned scholar of Sanskrit grammar, whose Sanskrit flourishing in the courtyard.

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लोहरदगा(कुडू) : लोहरदगा जिले के कुडू प्रखंड स्थित मराडीह गांव का ‘यशोदा भवन’ जिसके आंगन में संस्कृत आज भी फलफूल रही है। जिसमें संस्कृत व्याकरण के प्रकांड विद्वान रहते हैं, नाम है पंडित सीताराम शास्त्री। सीताराम शास्त्री अपने कार्य में पूरी तरह निपुण होने के साथ-साथ ये संस्कृत व्याकरण के ध्वजवाहक भी हैं। इनकी सबसे प्रशंसनीय बात यह भी है कि लोहरदगा जैसे आदिवासी बहुल ज़िले में संस्कृत भाषा को स्थापित करने में अहम योगदान रहा है। इसके अलावा ज्योतिष के क्षेत्र में भी ख्याति प्राप्त कर चुके हैं और जिनका ज्योतिष के प्रति विश्वास है, उन्हें सिताराम शास्त्री के पास खींच कर ले आता है। ज्योतिष ज्ञान में भी इनका नहीं है कोई जवाब.

झारखण्ड में बड़े-बड़े यज्ञ का शुभारम्भ किया- पंडित सीताराम शास्त्री

शास्त्री जी ने रांची के सोंस में अपने गुरु भाई रहे शिवचैतन्य ब्रम्हचारी और सदानंद सरस्वती जी के साथ मिलकर पहला यज्ञ करवाया जिसके बाद से लोहरदगा और झारखण्ड के विभिन्न हिस्सों में बड़े बड़े यज्ञ करवाये. धर्मसम्राट स्वामी करपात्री, जगत गुरु शंकराचार्य, शास्त्रार्थ महारथी माधवाचार्य, अखिलानन्द सरस्वती और प्रभावती कुमारी राधे जैसी कई बड़ी हस्तियों ने शिरकत की।

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संस्कृत समृद्ध व संस्कार की भाषा है- पंडित सीताराम शास्त्री

शास्त्री जी बताते हैं कि संस्कृत बहुत ही समृद्ध व सरल भाषा है। व्याकरण की दृष्टि से भी संस्कृत का कोई जोड़ नहीं हैं। इसके बावजूद संस्कृत का ज्ञान-विज्ञान किताबों में ही सिमट का रह गया है। आज संस्कार बनाने के लिए संस्कृत की शिक्षा बहुत ज़रूरी है। इसके बिना मातृ देवो भवः, पितृ देवो भवः, आचार्य देवो भवः और अतिथि देवो भवः के संस्कार नही आसकते। उनका सपना है कि स्वामी जी नारा कामयाब हो और धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भाव हो और विश्व का कल्याण हो।

आज भी मोपेड पर चलते हैं सिताराम शास्त्री

95 वर्ष की उम्र में भी अपना सारा काम स्वयं करते हैं। अपनी मोपेड में बैठकर बाज़ार करना, क्षेत्र में होने वाले कार्यक्रमो में शामिल होना आज भी बदस्तूर जारी है। अपने स्वास्थ का राज ‘योग’ बताते हुए कहते हैं कि वे बीते 15 वर्षों से लगातार 4 बजे सुबह उठाकर एक घण्टा योगाभ्यास करते हैं।

रिपोर्ट : शाहिर रजा खान

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