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जान जोखिम में डालकर पटरी पर चलने को मजबूर हैं लोग

ऊपरी पुल के अभाव में प्रतिदिन हजारों व्यक्ति इसी तरह रेलवे ट्रैक को पैदल पार करते हैं। लेकिन रेल प्रशासन बिल्कुल अनजान बना रहता है।

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अनिल कुमार की रिपोर्ट

पटना :- बिहार में एनटीपीसी बाढ़ को कोयला पूरा करने के लिए अलग से लाइन देने वाली बाढ़ रेलवे स्टेशन एक ऐसा रेलवे स्टेशन है ,जहां पता ही नहीं चलता है कि “सावन में पतझड़ है। या पतझड़ में सावन” !इस रेलवे स्टेशन पर बाबा आदम से मात्र एक उपरी पुल बना हुआ है। जो ट्रेन से उतरने वाले और ट्रेन पर चढ़ने वाले यात्रियों के लिए ही ना-काफी है। जबकि रेलवे स्टेशन से सटे उस पार के कई गांव ऐसे हैं।जहां के लोगों को हर काम के लिए स्टेशन बाजार आने का एकमात्र रास्ता है- रेलवे ट्रैक को पैदल पार करना।

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ऊपरी पुल के अभाव में प्रतिदिन हजारों व्यक्ति इसी तरह रेलवे ट्रैक को पैदल पार करते हैं। लेकिन रेल प्रशासन बिल्कुल अनजान बना रहता है। इस शव यात्रा के वक्त यदि गौर से सुने तो किसी गाड़ी की आने की घोषणा की जा रही है! फिर भी लोग जान जोखिम में डालकर पैदल ट्रैक पार करने पर अमादा है। किस यहां थोड़ी-सी असावधानी कितनी बड़ी घटना को अंजाम दे सकती है।

“आगे मातम और पीछे शहनाई” वाली इस दृश्य को गौर से देखिए! जिसमें आपको आगे-आगे ‘राम-नाम सत्य है’ के साध शव यात्रा दिखाई देगी, तो उसके पीछे गीत गाती महिलाओं की झुंड! पहला जत्था रेलवे ट्रैक को पैदल पार कर शमशान जा रहे हैं, तो दूसरी जत्था किसी शादी का रश्म निभाने! यह सिर्फ 1 दिन की बात नहीं है! ऊपरी पुल के अभाव में प्रतिदिन हजारों व्यक्ति इसी तरह रेलवे ट्रैक को पैदल पार करते हैं! लेकिन रेल प्रशासन बिल्कुल अनजान बना रहता है! इस शव यात्रा के वक्त यदि गौर से सुने तो किसी गाड़ी की आने की घोषणा की जा रही है! फिर भी लोग जान जोखिम में डालकर पैदल ट्रैक पार करने पर अमादा है! किस यहां थोड़ी-सी असावधानी कितनी बड़ी घटना को अंजाम दे सकती है!

जिसकी कल्पना मात्र से ही रूह कांप जाती है। लेकिन वर्षों से चली आ रही इस परंपरा पर न तो स्थानीय रेल पुलिस तत्पर है ,और ना ही भारतीय रेलवे दूसरा ऊपरी फूल बनाने की कवायद कर रही है! ऐसे में जब कभी भी कोई बड़ी घटना- दुर्घटना होगी, तो दो- चार लोग सस्पेंड किए जाएंगे? फिर जांच बिठाई जाएगी? और कुछ दिनों के बाद वह फाइल धूल फांकते नजर आएंगे?

इसलिए जरूरत है कि रेल विभाग किसी बड़ी हादसा का इंतजार ना कर पहले ही जाग जाए! और आम जनता की सुविधा के लिए बाढ़ रेलवे स्टेशन पर एक और उपरी पुल का निर्माण करें! जिसका सीधा कनेक्शन गांव से शहर की ओर हो! ताकि ग्रामवासी को जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार करना ना पड़ें ?

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