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सदर अस्पताल नवादा का पोस्टमार्टम हाउस नहीं है सुरक्षित

किसी भी इंसान के संदिग्ध मौत होने पर उसके कारणों को पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम (Postmortam) की व्यवस्था की गई है। इस व्यवस्था को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, जिससे मरणोपरांत मौत के कारणों की पूरी जानकारी मृतक के भेसरा से ही मिलता है। ऐसी हालातों में उन भेसरों की सुरक्षा का जिम्मा अस्पताल अधिकारी का होता है। लेकिन इन दिनों नवादा के सदर अस्पताल में बने पोस्टमार्टम हाउस की जो हालत है वह काफी दयनीय दिख रहा है।

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नवादाः- किसी भी इंसान के संदिग्ध मौत होने पर उसके कारणों को पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम (Postmortam) की व्यवस्था की गई है। इस व्यवस्था को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, जिससे मरणोपरांत मौत के कारणों की पूरी जानकारी मृतक के भेसरा से ही मिलता है। ऐसी हालातों में उन भेसरों की सुरक्षा का जिम्मा अस्पताल अधिकारी का होता है। लेकिन इन दिनों नवादा के सदर अस्पताल में बने पोस्टमार्टम हाउस की जो हालत है वह काफी दयनीय दिख रहा है। यहां रखे जाने वाले भेसरा सहित कई महत्वपूर्ण उपकरण सुरक्षित नहीं है। इसका सबसे बड़ा कारण रख-रखाव में ध्यान नहीं दिया जाना है। महीनों से इस पोस्टामर्टम हाउस के दरवाजा टूटा हुआ है। जिसके माध्यम से जानवरों के घुसने का डर बना हुआ है।

चूहा, बिल्ली और कुत्तों से पूरी तरह पोस्टमार्टम हाउस सुरक्षित नहीं है। इतना ही नहीं यहां पानी का उचित व्यवस्था तक नहीं की गई है। जबकि पोस्टमार्टम हाउस के बाहर प्रतिदिन हजारों लीटर पानी बेकार बहकर बर्बाद हो जा रहा है। इस परिस्थिति में किसी की मौत का जांच प्रभावित हो सकता है, जो इंसान के मरणोपरांत अंतिम सबूत माना जाता है। सदर अस्पताल में आये दिन आम नागरिकों का आना-जाना लगा रहता है, ऐसे में जर्जर पोस्टमार्टम हाउस के अंदर महत्वपूर्ण भेसरा का सुरक्षित रखना अस्पताल प्रबंधन के लिए चुनौती से कम नहीं है।

सदर अस्पताल प्रवेश करने के बाद पूरब-दक्षिण दिशा में पोस्टमार्टम हाउस बना हुआ है। इसके पहले ही सिविल सर्जन का कार्यालय है। हालात यह हो गई है कि इस पोस्टमार्टम हाउस की सुरक्षा के साथ-साथ यहां आने वाले लावारिस शवों की रख-रखाव का इंतजाम नहीं है। इससे सटे ही अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे विभाग भी है। लेकिन जब कई दिनों तक पोस्टमार्टम हाउस के बाहर लावारिष शव को छोड़ दिया जाता है तो लोगों का यहां ठहरना मुष्किल हो जाता है। मजबूरी में यहां जो भी लोग जांच के लिए जाते हैं वह अपना मुंह और नाक ढंक कर जाने को मजबूर हो जाते हैं। कई बार लोगों क्षत-विक्षत शव से होने वाली बदबू के कारण संक्रमण का षिकार तक हो जा रहे हैं। बावजूद अस्पताल प्रशासन पोस्टमार्टम हाउस के मामले में गम्भीरता नहीं दिख रही है।

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7-8 सालों से पोस्टमार्टम हाउस

शहर के माल गोदाम में कई दशकों तक रहा पोस्टमार्टम हाउस पिछले 7-8 सालों से स्थानांतरित कर सदर अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। उन दिनों आबादी कम रहने के कारण शहर के माल गोदाम में पोस्टमार्टम हाउस चला करता था। लेकिन आबादी बढ़ने के साथ ही स्थानीय लोगों द्वारा विरोध किये जाने के बाद उसे स्थानांतरित कर सदर अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया। परंतु अस्पताल प्रशासन ने इस बात का ख्याल नहीं रखा कि एक घनी आबादी से उठाकर इस पोस्टमार्टम हाउस को दुसरे घनी आबादी वाले इलाके के बीच शिफ्ट कराया जा रहा है। हालात अब यह हो गई है कि उसके आसपास रहने वाले लोगों को ऐसी सड़े-गले शवों के कारण रहना मुश्किल हो गया है। पोस्टमार्टम हाउस में यह हालात आये दिन देखने को मिलता है।

स्वास्थ्य विभाग नहीं कर रही इस्तेमाल

गौरतलब हो कि शव गृह के रहते हुए उसका इस्तेमाल अभी तक नहीं किया जा रहा है। यह अस्पताल प्रशासन के शिथिलता का प्रमाण सामने आ रही है। स्वास्थ्य विभाग इसे गम्भीरता से लेने के बजाय थानों पर जिम्मेदारी सौंपकर अपना पलड़ा झाड़ ले रही है। किसी भी शव को शिनाख्त के लिए जिला मुख्यालय में ही रखे जाने का प्रावधान है, बावजूद उसे थानों में रखने का दबाव बनाया जा रहा है। इसके लिए शव गृह का इस्तेमाल करने में स्वास्थ्य विभाग दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। बताया जाता है कि शव गृह बनकर तैयार है लेकिन विभागीय प्रक्रिया के तहत सौंपे नहीं जाने के कारण पोस्टमार्टम हाउस में ही अज्ञात शवों को रखा जा रहा है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग अपनी जवाबदेही को पुलिस के मत्थे डाला दे रही है। इससे आम लोगों के लिए भी बड़ी परेशानी हो गई है।

क्या कहते हैं सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डाॅ श्रीनाथ प्रसाद ने कहा कि पोस्टमार्टम हाउस में जो भी कमियां है उसे ठीक कराने पर पहल की जा रही है। इंजीनियर पोस्टमार्टम हाउस का काम करने में कतरा रहे हैं, बावजूद उनको काम कराकर पोस्टमार्टम हाउस को दुरूस्त कराने की दिषा में पहल की जा रही है। यह एक महत्वपूर्ण काम है, जहां किसी के मरोणोपरांत उसका सबूत होता है। इसके अलावा शव गृह अभी तक जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य विभाग को सौंपा नहीं गया है।

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