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दलबदलुओं से परेशान हुई आमजनता, सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र को दिया निष्पक्ष कमेटी बनाने का निर्देश

The public was disturbed by the defectors, the Supreme Court directed the Center to form a fair committee

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रांची- भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जहां आम जनों का प्रतिनिधित्व वोट के माध्यम से होता है लोग अपने भावनाओं और जज्बात के अनुसार अपने प्रतिनिधि को चुनते हैं वोट देकर पर क्या होगा जब उनका प्रतिनिधि उनके भावनाओं से खेल कर किसी दूसरे दल में चले जाएं. आम जनों के इस हक को सुरक्षित करने के लिए भारत का सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को करा निर्देश देते हुए तीन लोगों की एक निष्पक्ष कमेटी बनाने के का निर्देश दिया है .इस पर पूर्व झारखंड के विधानसभा अध्यक्ष और  और पूर्व कैबिनेट मंत्री सीपी सिंह और नीलकंठ सिंह मुंडा जहां एक और इसका स्वागत किया. वहीं दूसरी तरफ कानून को अमलीजामा पहनाने जाने में संदेह व्यक्त किया है. गौरतलब बात यह है कि पिछले विधानसभा चुनाव  जीतने के बाद जेबीएम के 6 विधायक बागी हो गए थे, सत्ता दल सत्तारूढ़ दल भाजपा में शामिल हो गए. करीब साढ़े 4 साल तक विधानसभा अध्यक्ष के कोर्ट में मामला लंबित रहा और फिर विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें हाई कोर्ट जाने को कहा जिस वजह से विधायकों का टेन्योर पूरा हो गया और इसका  कानून का प्रतिफल नहीं निकल पाया. जबकि कर्नाटका में ऐसी ही घटना घटी कांग्रेस के 18 विधायक बागी हुए जिसका अंजाम यह हुआ कि विधानसभा अध्यक्ष ने 18 विधायक की मान्यता रद्द कर दी. कांग्रेस भी इस कानून का स्वागत करती है. बहरहाल सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश केंद्र सरकार को जरूर दे दिया है कि विधायकों एमपी और एमएलसी समेत राजनीतिक दलों की समस्या का निराकरण करने के लिए एक ट्रे बनल बनाएं क्योंकि स्वतंत्र हो और समस्याओं का निष्पादन त्वरित हो देखने वाली बात यह होगी कब यह  ट्रिब्यूनल  बनता है.

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