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नई शिक्षा नीति से विद्यार्थी कर सकेंगे बेहतर तरीके से अपने भविष्य का निर्धारण

With the new education policy, students will be able to determine their future in a better way

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रांची: केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति का राजधानी रांची के शिक्षकों ने बच्चों के बेहतर भविष्य गढनेवाला बताया है। राजधानी के शिक्षकों ने कहा है कि नई शिक्षा नीति से विद्यार्थी अपने भविष्य का बेहतर तरीके से निर्धारित कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1986 के बाद से देश में कोई शिक्षा नीति नहीं आई थी और शिक्षा पद्धति की जरूरत महसूस की जा रही थी।
विषयों के बंधन से मिली विद्यार्थियों को आजादी: आशुतोष- रांची के जिला स्कूल के प्रधानाचार्य आशुतोष कुमार सिंह का कहना है कि नई शिक्षा नीति में विद्यार्थियों को विषयों के बंधन से मुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई विद्यार्थी हिस्ट्री के साथ फिजिक्स पढना चाहता है तो उसे पढने की आजादी मिलेगी। उन्होंने कहा कि अब कॉमर्स पढनेवाला विद्यार्थी भी बायोलॉजी पढना चाहता है तो वह पढ सकता है। उन्होंने कहा कि ग्रेजुएशन के चार साल करने से विद्यार्थियों को उनके विषयों की अधिक जानकारी होगी, जो उनके भविष्य में काम आएगा।
विद्यार्थी छठी कक्षा से ही चुन सकेंगे भविष्य की राह: अशोक- राजकीयकृत मध्य विद्यालय, पंडरा के प्रधानाचार्य अशोक प्रसाद सिंह कहते हैं कि नई शिक्षा नीति में विद्यार्थी छठी कक्षा से ही अपने भविष्य की राह चुन सकेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र की यह नीति तभी फलीभूत होगी, जब राज्य सरकारें भी इसे हुबहू तरीके से लागू करेंगी। उन्होंने कहा कि देश में पिछले कई वर्षों से एक बेहतर शिक्षा नीति की कमी महसूस की जा रही थी।

पांचवीं तक मातृभाषा का कंसेप्ट स्वागतयोग्य: डा अनिल-एसएन मारवाड़ी गर्ल्स प्लस टू स्कूल, अपर बाजार के शिक्षक डा अनिल अरूण कहते हैं कि पांचवीं कक्षा तक मातृभाषा में पढ़ाई बढिया कंसेप्ट है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा की पांचवीं तक की शिक्षा झारखंड और बिहार में पूर्व से लागू है। उन्होंने कहा कि इस कंसेप्ट को बडेÞ शहरों के स्कूलों में भी लागू कराना चाहिए। ताकि बच्चों की शिक्षा में असमानता नहीं हो। ताकि आगे चलकर शिक्षा में असमानता की स्थिति पैदा नहीं हो। उन्होंने कहा कि शोध करनेवाले विद्यार्थियों के लिए स्नातक चार साल के लिए किया जाना भी अच्छा निर्णय है। इससे शोध करनेवाले बच्चों को मदद मिलेगी, लेकिन जो बच्चे स्नातक के बाद पढाई नहीं करना चाहेंगे उनके लिए स्नातक तीन साल का ही होगा। उन्होंने कहा कि विदेशों के विश्वविद्यालय और देश के विश्वविद्यालयों में प्रतिस्पर्द्धा करने से सरकारी विश्वविद्यालयों के पिछड़ने का खतरा रहेगा।

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