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प्याज के उत्पादन और आपूर्ति में 40 प्रतिशत का अंतर

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 सरकार प्याज का मूल्य नियंत्रित करने के लिए हरसंभव उपाय कर रही है, लेकिन मानसून के आने में देरी और बाद में भारी वर्षा के कारण उत्पादन और आपूर्ति में 30 से 40 प्रतिशत के अंतर के करण इसके मूल्य में तेजी बनी हुयी है।
खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने आज यहाँ उच्च स्तरीय बैठक में देश में प्याज की उपलब्धता और मूल्य को लेकर लगभग दो घंटे तक समीक्षा बैठक की। बैठक में उपभोक्ता मामलों के सचिव अविनाश कुमार श्रीवास्तव, खाद्य सचिव रविकांत तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में प्याज के मूल्य में वृद्धि के कारणों और उसे नियंत्रित करने के उपायों पर चर्चा की गयी। बैठक में जानकारी दी गयी कि मानसून के आगमन में हुई देरी से प्याज लगाने में देर हुयी जिससे बाजार में इसकी आपूर्ति प्रभावित हुयी है। कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा से भी प्याज को नुकसान हुआ है।
श्री पासवान ने बताया कि प्याज की कमी को दूर करने के लिए 56,700 टन का बफर स्टाक बनाया गया है और 1,525 टन प्याज नेफेड के पास है। वर्तमान में इसके निर्यात पर रोक है जिससे इसकी उपलब्धता बढ़ी है। इसके अलावा प्याज के आयात में विभाग सहूलियतदाता की भूमिका निभायेगा।
श्री पासवान ने कहा कि असामान्य वर्षा के कारण प्याज के उत्पादन और आपूर्ति में 30 से 40 प्रतिशत का अंतर बना हुआ है।

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