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नहीं होगा रेलवे का निजीकरण

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय रेलवे के निजीकरण के आरोपों को किया खारिज

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रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय रेलवे के निजीकरण के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि रेलवे का निजीकरण कोई नहीं कर सकता, लेकिन सेमी हाईस्पीड गाड़ियों के परिचालन तथा बेहतर यात्री सुविधाओं के लिये यदि बाहर से निवेश आता है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए।

श्री गोयल ने आम बजट में रेलवे की अनुदान मांगों पर 12 घंटे तक चली चर्चा का जवाब देते हुए शुक्रवार को यह बात कही। उन्होंने कहा, “रेलवे का निजीकरण कोई कर ही नहीं सकता और रेलवे के निजीकरण का कोई सवाल ही नहीं है। लेकिन कोई नयी टेक्नोलॉजी लेकर आता है रेल के आधुनिकीकरण के लिए, कोई सेमीहाईस्पीड ट्रेन चलाता है और यात्री सुविधाओं को बढ़ाने में योगदान करता है तो ऐसे निवेश का सबको स्वागत करना चाहिए।”

रेल मंत्री ने 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश के बारे में सदस्यों के सवालों के बारे में कहा कि रेलवे छह लाख करोड़ रुपए के निवेश से क्षमता संवर्द्धन करेगी और समर्पित मालवहन गलियारे (डीएफसी) बनायेगी जिस पर 4.5 लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे। स्वर्णिम चतुर्भुज एवं तिर्यक मार्गों पर गाड़ियों की गति बढ़ाने के लिए डेढ़ लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे।

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श्री गोयल ने कहा कि रेलवे की एक-एक समस्या को जड़ से पहचानने और उसी जगह से उसका इलाज करने का प्रयास किया है और किस प्रकार से राजनीति से दूर रह कर देश एवं जनता की भलाई को रेलवे में आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि रेलवे के निजीकरण की बात कही जा रही है लेकिन हमको सुविधाएं बढ़ानी हैं। बड़े रूप में निवेश हो, अच्छी सुगम यात्रा हो, माल ढुलाई बढ़े। इसके लिए निजी सरकारी साझीदारी (पीपीपी) मॉडल पर काम होगा। कुछ इकाइयों का निगमीकरण किया जाएगा। उन्होंंने कहा कि रेलवे में 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश करेंगे, यह साहस भरा फैसला है। हम नयी सोच से नयी दिशा में काम करेंगे।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2009-10 में संरक्षा पर 2107 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया था लेकिन इस साल हमने 5690 करोड़ रुपए इसके लिए आवंटित किये हैं। संरक्षा पर ध्यान देने से बीते वित्त वर्ष में दुर्घटनाओं की संख्या 95.5 के स्तर पर आ गयी है और मौतों की संख्या 50 से कम रह गयी है। ऐसा सुधार रेलवे में पहले कभी शायद ही देखा गया हो। उन्होंने कहा कि परिचालन लागत पर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों का दबाव होने के कारण दक्षता सुधार कर रेलवे की वहन क्षमता बढ़ायी और खर्चों में कमी लायी गयी। इससे रेलवे मुनाफे में बनी रही।

भारतीय जीवन बीमा निगम से निवेश लाने के बारे में उठे सवालों का जवाब देते हुए रेल मंत्री ने कहा कि एलआईसी से अब तक करीब 18000 करोड़ रुपए की राशि ली गयी है और जब भी जरूरत होगी तो और लेंगे। उन्होंने कहा कि रेलवे निवेश की जरूरतों को पूरा करने में उस जगह से पैसा लेना चाहेगी जहां कम ब्याज देना पड़े।

रेलवे बजट को आम बजट में मिलाने की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि रेल बजट को आम बजट में विलीन करने की देश में और दुनिया में सराहना हुई है। रेल बजट एक राजनीतिक बजट हुआ करता था और वोट बैंक को ध्यान में रख कर ख्याली पुलाव मात्र होता था। ऐसा बजट देश को और जनता को गुमराह करने वाला होता था। योजनाएं, घोषणाएं बहुत होतीं थीं लेकिन पैसे का आवंटन नहीं होता था।

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