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पोस्टमार्टम हाउस से आम लोगों का जीना हुआ मुहाल

सड़े-गले अज्ञात शवों को सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में रखे जाने से लोग परेशान

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नवादा:- शहर के घनी आबादी वाले इलाके में वर्षों पुराना बने सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। यहां आये दिन लावारिस लाशों के कई दिनों तक शिनाख्त के लिए रखे जाने से लोगों में बीमारी फैलने का डर बन गया है।

सड़े-गले शवों को शिनाख्त के लिए कई दिनों तक सदर अस्पताल परिसर में छोड़ दिया जा रहा है। जिससे आस-पास के घरों में रहने वाले तथा सदर अस्ताल आने मरीजों का जीना मुश्किल हो गया। एक तरफ बीमारी का इलाज कराने लोग आते हैं और दूसरी तरफ ऐसे बदबूदार शवों के गंध से बीमार पड़ जा रहे हैं। वहीं सदर अस्पताल से सटे दर्जनों मकानों में रहने वाले लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। गौरतलब हो कि 10 जून को हिसुआ से आई अज्ञात शव को 4 दिनों बाद 13 मई को स्थानीय थाना के लोग ले गए। वहीं वारिसलीगंज से आई एक अज्ञात शव को पोस्टमार्टम के बाद संवाद प्रेषण तक सदर अस्पताल में चौकीदार की सुरक्षा में पड़ा हुआ है।

जबकि नगर थाना क्षेत्र के कन्हाई इंटर विद्यालय के पास काली मंदिर के समीप पुलिस द्वारा बुधवार की देर शाम बरामद की गई अज्ञात शव भी पोस्टमार्टम के बाद पहचान के लिए सदर अस्पताल परिसर में रखा है। इतने-इतने दिनों तक सदर अस्पताल परिसर में बने पोस्टमार्टम हाउस में रखे जाने वाले सड़े-गले शवों की बदबू से लोग काफी त्रस्त हैं।

हिसुआ से आया अज्ञात शव कई दिनों से पोस्टमार्टम हाउस में है पड़ा

पिछले करीब चार दिनों से सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में हिसुआ से एक अज्ञात शव आया, लेकिन वह अभी तक पोस्टमार्टम हाउस में ही पड़ा हुआ है। जिसके कारण यहां आने वाले लोगों में दहशत बनी हुई है। शव के बदबू से पूरा अस्पताल बीमार हो चुका है। दुर्भाग्य तो इस बात का है कि इस पोस्टमार्टम हाउस से सटे सिविल सर्जन और एचआईवी जांच कार्यालय है। बावजूद अस्पताल प्रशासन इस पर गम्भीरता नहीं दिखा रही है।

सदर अस्पताल के पूरब-दक्षिण में है पोस्टमार्टम हाउस

सदर अस्पताल प्रवेश करने के बाद पूरब-दक्षिण दिशा में पोस्टमार्टम हाउस बना हुआ है। इसके पहले ही सिविल सर्जन का कार्यालय है। हालात यह हो गई है कि अब कोई भी इस तरफ जाने को तैयार नहीं है। इससे सटे ही अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे विभाग है। लेकिन मजबूरी में यहां जो भी लोग जांच के लिए जा रहे हैं वे अपना मुंह और नाक ढंक कर जाने को मजबूर हैं। कई लोगों को बदबू के कारण उल्टी तक हो गई है। बावजूद अस्पताल प्रशासन इस मामले को गम्भीरता से नहीं ले रही है।

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7-8 सालों से सदर अस्पताल में है पोस्टमार्टम हाउस

शहर के माल गोदाम में कई दशकों तक रहा पोस्टमार्टम हाउस पिछले 7-8 सालों से स्थानांतरित कर सदर अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। उन दिनों आबादी कम रहने के कारण शहर के माल गोदाम में पोस्टमार्टम हाउस चला करता था। लेकिन आबादी बढ़ने के साथ ही स्थानीय लोगों द्वारा विरोध किये जाने के बाद उसे स्थानांतरित कर सदर अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया। परंतु अस्पताल प्रशासन ने इस बात का ख्याल नहीं रखा कि एक घनी आबादी से उठाकर इस पोस्टमार्टम हाउस को दुसरे घनी आबादी वाले इलाके के बीच शिफ्ट कराया जा रहा है। हालात अब यह हो गई है कि उसके आसपास रहने वाले लोगों को ऐसी सड़े-गले शवों के कारण रहना मुश्किल हो गया है। पिछले कई दिनों से अज्ञात लाशों के बदबू से परेशान आसपास के कई लोग अपना घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां जा चुके हैं।

शव गृह को स्वास्थ्य विभाग नहीं कर रही इस्तेमाल

गौरतलब हो कि शव गृह के रहते हुए उसका इस्तेमाल अभी तक नहीं किया जा रहा है। यह अस्पताल प्रशासन के शिथिलता का प्रमाण सामने आ रही है। स्वास्थ्य विभाग इसे गम्भीरता से लेने के बजाय थानों पर जिम्मेदारी सौंपकर अपना पलड़ा झाड़ ले रही है। किसी भी शव को शिनाख्त के लिए जिला मुख्यालय में ही रखे जाने का प्रावधान है, बावजूद उसे थानों में रखने का दबाव बनाया जा रहा है।

इसके लिए शव गृह का इस्तेमाल करने में स्वास्थ्य विभाग दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। बताया जाता है कि शव गृह बनकर तैयार है लेकिन विभागीय प्रक्रिया के तहत सौंपे नहीं जाने के कारण पोस्टमार्टम हाउस में ही अज्ञात शवों को रखा जा रहा है। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग अपनी जवाबदेही को पुलिस के मत्थे डाला दे रही है। इन दिनों पोस्टमार्टम हाउस में कई दिनों तक रखे शवों से जो हालात उत्पन्न हो रही है उससे आम लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी हो गई है।

क्या कहते हैं सिविल सर्जन

सदर अस्पताल में जो भी अज्ञात शव आता है उसे सम्बंधित थानों को अपने क्षेत्र में रखना चाहिए, लेकिन लोग पोस्टमार्टम हाउस में ही छोड़ देते हैं। पुलिस को इसका जवाबदेही लेना चाहिए। एसपी से बात हुई है, अज्ञात शवों को सम्बंधित थाना क्षेत्रों में रखे जाने का आग्रह किया गया है। शव गृह शहर से काफी दूर है, वहां ले जाने में परेशानी है और शव गृह अभी तक जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य विभाग को सौंपा नहीं गया है। इसका कुछ उपाय किया जायेगा।

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