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श्री राजपूत करणी सेना द्वारा क्षत्रिय सम्राट मिहिरभोज प्रतिहार की मनाई गई जयंती

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डेहरी ऑन  सोन (रोहतास) – शहर के जीटी रोड कोल डिपो के समीप शुक्रवार को श्री राजपूत करणी सेना द्वारा क्षत्रिय सम्राट मिहिरभोज प्रतिहार की जयंती मनाई गई। सर्वप्रथम उपस्थित लोगों ने सम्राट मिहिरभोज के तैल चित्र पर बारी-बारी माल्यार्पण व पुष्प अर्पित किया। समारोह को संबोधित करते हुए जिला संरक्षक पप्पू सिंह ने कहा कि मिहिरभोज प्रतिहार प्रतिहार राजपूत वंश के एक महान राजा थे सभी ऐतिहासिक लेखों में इन्हें भगवान श्री राम के भाई लक्ष्मण जी का वंशज कहां गया है। इस वंश का स्वर्णिम इतिहास छठी शताब्दी से बारह सौ शताब्दी तक माना जाता है। इन्होंने राजस्थान के मंडोर, भीनमाल, जालौर गुजरात, कन्नौज, ग्वालियर, उज्जैन, नागौद आदि जगह राज स्थापित किया। गुर्जर प्रदेश में शासन करने की वजह से इन्हें गुर्जरा नरेश या गुर्जर प्रतिहार भी कहा जाता है। वर्तमान में इनकी कई शाखाएं भी देश भर में मौजूद है। यह कन्नौज के शासक भी थे। इन्होंने 836 ईस्वी से 850 ईसवी तक लगभग 50 वर्षों के युद्ध काल का शासन किया। उनका साम्राज्य का विस्तार आज के मुल्तान से पश्चिम बंगाल तक और कश्मीर से कर्नाटक तथा कन्नौज में इस वंश ने करीब ढाई सौ वर्ष तक शासन किया था। इन्होंने अपने शासनकाल में कई वर्षों तक मुस्लिम आक्रमणकारियों से युद्ध लड़े, और कभी भी हिंदुत्व सनातन धर्म पर आंच नहीं आने दी। इनके अतुल्य साहस और शासन गुणवत्ता से मुस्लिम आक्रमणकारी लगातार पूरे विश्व में मुस्लिम वाद स्थापित करते जा रहे थे। मगर सनातन धर्म की मिट्टी में ही आकर उन्होंने अपना दम तोड़ा। जिला महामंत्री डिंपल सिंह राठौर ने कहा कि सम्राट मिहिर भोज ने भारतीय संस्कृति के शत्रु मिले तो यानी मुस्लिमपुर को अरबों को पराजित ही नहीं किया, अपितु उन्हें इतना भयाक्रांत कर दिया था, कि वे आगे आने वाली एक शताब्दी तक भारत की ओर आंख उठाकर देखने का विश्वास नहीं कर सके थे। ऐसा राजा जिसका समय राज्य संसार में सबसे शक्तिशाली था, इनके साम्राज्य में चोर डाकू का कोई भय नहीं था। सुदृढ़ व्यवस्था व आर्थिक संपन्नता इतनी थी, कि विदेशियों ने भी भारत को सोने की चिड़िया कहा। इनके शासनकाल में सर्वाधिक अरबी मुस्लिम लेखक भारत भ्रमण के लिए आए और लौटकर उन्होंने भारतीय संस्कृति सभ्यता, आध्यात्मिक, दार्शनिक, ज्ञान-विज्ञान, आयुर्वेद, सार्वभौमिक, समृद्ध जीवन दर्शन, को अरब जगत सहित यूनान और यूरोप तक प्रचारित किया। यह ऐसा शासक थे जिसने आधे से अधिक विश्व को अपनी तलवार के जोर पर अधिकृत कर लेने वाले अरब तक मुस्लिम आक्रमणकारियों को भारत की धरती पर पांव नहीं रखने दिया। उनके सम्मुख सुदृढ़ दीवार बनकर खड़े हो गए। उनकी शक्ति और प्रतिरोध से कितने भयाक्रांत हो गए, कि उन्हें जीतने के लिए जगह ढूंढना कठिन हो गया था। ऐसा किसी भारतीय लेखक ने नहीं बल्कि मुस्लिम इतिहासकारों विलादूरी सलमान एवं अलमसूदी ने भी लिखा है। मौके पर उपस्थित अन्य वक्ताओं ने सम्राट मिहिरभोज की जीवनी का अध्ययन करने और उनके पद चिन्हों पर चलने का आह्वान किया तथा समाज व राष्ट्र की रक्षा के लिए सभी को सदैव तत्पर रहने का संदेश दिया। समारोह में वेद कल्याण फाउंडेशन निदेशक समीर दुबे, प्रोफेसर कन्हैया सिंह, समर प्रताप सिंह, करण सिंह, कमलेश सिंह, अम्बुज सिंह, प्यारेलाल ओझा, निशांत राज उर्फ प्रिंस, विकाश सिंह, सरपंच विनोद सिंह, राहुल सिंह, अमन सिंह, सूर्य प्रकाश, राहुल सिंह उर्फ टप्पू, अमित सिंह, सोनू सिंह आदि उपस्थित थे।

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