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टीबी की दवा लिखने एवं बेचने वालों को दिए गए निर्देश

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सासाराम – टीबी मुक्त समाज निर्मित करने की दिशा में राज्य स्वास्थ्य समिति ने अधिक से अधिक टीबी रोगियों को चिन्हित करने के लिए निर्देश जारी किया है. इसके लिए टीबी निरोधी क्लिनिकल संस्था, फार्मेसी, केमिस्ट एवं दवा विक्रेताओं को टीबी रोगी के संबंध में सम्पूर्ण जानकारी राज्य/ जिला टीबी अधिकारी/ नोडल पदाधिकारी को हार्ड अथवा सॉफ्ट कॉपी में देने को अनिवार्य किया गया है. इससे जिले में वास्तविक टीबी मरीजों की संख्या का अनुमान एवं टीबी रोगियों के लिए सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.जिला टीबी विभाग द्वारा नियमित अनुश्रवण : जिला टीबी पदाधिकारी डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि टीबी की दवा लिखने एवं बेचने वालों द्वारा टीबी रोगियों के संबंध में सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने से रोगियों का सटीक आकलन किया जा सकेगा. उन्होंने बताया कि जिले के लगभग 5 फार्मासिस्ट एवं लगभग 5 निजी चिकित्सकों से टीबी मरीजों की जानकारी प्राप्त हो रही है. साथ ही उनके द्वारा भेजी जा रही जानकारी के सत्यापन के लिए जिला टीबी विभाग द्वारा नियमित अनुश्रण भी किया जा रहा है.
निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराने में आसानी : डॉ. कुमार ने बताया कि जिला में 2 सीबी नेट मचीं उपलब्ध है जो की एक सदर अस्पताल और दुसरा दिनारा प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में है जहां निशुल्क परीक्षण होगा। उन्होने यह भी बताया की टीबी रोगियों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार द्वारा प्रदान की जा रही प्रति माह 500 रूपये की धनराशि दी जा रही है. निजी चिकित्सक एवं फार्मासिस्ट द्वारा उपलब्ध करायी गयी जानकारी से सभी रोगियों को पोषण राशि प्रदान करने में आसानी होगी. जिला टीबी विभाग निरंतर टीबी मरीजों को चिन्हित करने का प्रयास कर रही है. इसके लिए सक्रिय टीबी मरीज खोजी अभियान भी चलाया जा रहा है. सही समय पर टीबी मरीजों की पहचान करने से उनका सम्पूर्ण ईलाज संभव है. इसके लिए सरकार द्वारा टीबी रोगियों के लिए निःशुल्क टीबी की दवा( डॉट्स) की उपलब्धता जिले के साथ अन्य प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्य केन्द्रों में भी करायी गयी है. अधिनियम उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान : टीबी निरोधी क्लिनिकल संस्था, फार्मेसी, केमिस्ट एवं दवा विक्रेताओं द्वारा टीबी रोगी के संबंध में सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं कराने की दशा में दंड संहिता( 1860 का 45) के धारा 269 के तहत दोषी व्यक्ति को (लापरवाहीपूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए खतरनाक रोग की संक्रमण की संभावना बढती हो) को छह महीने तक की सजा एवं जुर्माना हो सकता है. जबकि दंड संहिता( 1860 का 45) के धारा 270 के तहत दोषी व्यक्ति को (परिद्वेषपूर्ण कार्य जिससे जीवन के लिए खतरनाक रोग की संक्रमण की संभावना बढती हो) दो वर्ष तक की सजा एवं जुर्माना हो सकता है.

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