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तिलौथू के एक सपूत ने फहराया राष्ट्रीय परचम

तलवारबाजी स्पर्धा में हासिल किया स्वर्ण पदक

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तिलौथू(रोहतास)

तिलौथू प्रखंड के सरैया ग्राम रहिवासी सैयद शब्बार हुसैन और शाजी खातून के 10 वर्षीय पुत्र सैयद अनवर हुसैन ने 10 वर्ष से कम आयु की तलवारबाजी स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल कर,तिलौथू प्रखंड के नाम को राष्ट्रीय गौरव दिलाने का कार्य किया है। सैयद अनवर हुसैन की इस सफलता में उनकी माँ शाजी खातून का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहा है।

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शाजी खातून एन आई आई टी दिल्ली से सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में टॉपर रह चुकी हैं और फिलहाल मुम्बई में कार्यरत हैं। शब्बार हुसैन की सहमति से शाजी ने अपने बेटे अनवर को मुम्बई में ही पढ़ाने का फैसला किया और अनवर नवी मुम्बई में स्थित पोद्दार स्कूल में चौथी क्लास का छात्र है। अनवर के पिता भी इंजीनियर हैं, ऐसे में एक शिक्षित माँ बाप का संरक्षण रहने के कारण अनवर ने जब अपने बचपन में ही स्कूल में चलाए जा रहे तलवारबाजी प्रशिक्षण के प्रति इच्छा जताई तो उसकी मां ने तुरंत इसको स्वीकार कर लिया और तलवारबाजी प्रशिक्षण में उसका नामांकन करा दिया।

अनवर ने भी अपने माँ बाप के निर्णय को सही साबित करने में कोई कमी नही की और 2 वर्ष के अंदर ही अपनी प्रतिभा से सबको चौकाने लगा। अनवर इतनी कम उम्र में ही तलवारबाजी स्पर्धा के लिए विदेश भी जा चुका है। इस बार अनवर ने अगस्त महीने में नाशिक में सम्पन्न हुई राष्ट्रीय तलवारबाजी स्पर्धा के अंडर 10 वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल कर न केवल अपने स्कूल का नाम बढ़ाया है बल्कि बिहार के तिलौथू प्रखंड के नाम को भी राष्ट्रीय क्षितिज पर लाने का कार्य किया है। इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता को फतह करने के बाद अनवर का चयन 3 सितंबर से थाईलैंड में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा के लिए किया गया है।

अनवर के माता पिता अनवर की इस सफलता से काफी गौरवान्वित महसूस करते हैं। माँ शाजी खातून की मानें तो अनवर तलवारबाजी में बहुत ही लगन से अभ्यास करने में जुटा रहता है और उसको इस स्तर पर प्रशिक्षित करने में उसके गुरु पेरियास्वामी सीवन का योगदान सबसे महत्वपूर्ण है। वहीं अनवर के पिता शब्बार उसकी इस सफलता का पूरा श्रेय अपनी पत्नी शाजी को देते हैं और कहते हैं कि अनवर को इस ऊंचाई पर ले जाने में शाजी का त्याग और मेहनत सबसे महत्वपूर्ण है। अनवर ने जिस तरीके से अपने 10 वर्ष के उम्र में ही तिलौथू प्रखंड के नाम को राष्ट्रीय स्तर पर लाने का प्रयास किया है, उसको देखते हुए उम्मीद है कि आने वाले कुछ वर्षों में तिलौथू प्रखंड के नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चित होता दिखाई देगा।

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