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जहां हिन्दू महिलाएं पुजती है ताजिया को और मांगती है मन्नत , ग्रामीण भारत के सौहार्द की अद्भुत तस्वीर

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सुपौल .

ये तस्वीर आधुनिक भारत के छातापूर थाना क्षेत्र के लालपुर गांव की है, जहां ना तो सम्प्रदायवाद है ना धर्म बाद, आपसी सौहार्द की अद्भुत मिशाल पेश करती ये तस्वीर उन लोगों के लिए एक सीख है और सबक भी  जो इंसान  को इंसान से दूर करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ते  है।  मुहर्रम में ऐसी ही एक बानगी पेश कर रहे  हैं,  छातापूर के लालपूर गांव के लोग ।

ढोल नगाड़े की थाप पर हाय हुसैन हाय हुसैन के नारों से गूंजता मुहर्रम के ताजिया के साथ जंगियों  का जुलूस एक दरवाजे से दूसरे दरवाजे पर जाती है ,मुहर्रम में मुस्लिम  समुदाय के लोग लाठी, भाले और तलवार से करतब दिखा रहे हैं।  पर जिसके दरवाजे पर जुलूस गया है, उस घर की महिला थाली में दूब, धान, अगरबत्ती और पैसे लेकर ताजिया के पास आती है, उनका इत्मीनान से पूजा करती है और चंद रकम ताजीया को संभाले व्यक्ति को देकर फिर अपने आंगन चली जाती है।

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ये कमोवेश गांव के हर हिन्दू परिवार की परम्परा है ,गांव के लोग कहते है जब से होश संभाला है तबसे ये सिलसिला कायम है। .लगता ही नहीं की ये दूसरे सम्प्रदाय त्यौहार है।  कुछ हिन्दू लोग तो जंगी में घुसकर लाठी भी भांजने लगते हैं।  ये अद्भुत और अविस्मरणीय परम्परा है, जो आज के इस विकट दौर में भी इस गांव के लोग संजोए हुए है।

लोगों को आज के बदलते हिन्दुस्तान से मलाल भी है, एक व्यक्ति ने तो ये भी कह दिया कि पहले सुनते थे कि प्रजातंत्र मूर्खों का शासन है , पर अब लगता है कि समय बदल गया है, अब प्रजातंत्र धूर्तों का शासन हो गया है।  इस वाक्य के पीछे छुपा हुआ कुछ तर्क भी दिया गया ,कहा कि पहले आपसी सौहार्द था। इतनी जाति भेद नहीं थी, ना ही सम्प्रदायबाद था।  लोग एक दूसरे के सारे कार्यो और पर्व त्यौहार में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते थे पर राजनैतिक कारणों से राजनीति के गलत दिशा में चले जाने के कारण, आज वोट के कारण समाज जाति धर्म सम्प्रदाय में दूरियां बढा दी गयी है।

गांव के शक्ति नाथ झा , विनोद झा , राजेन्द्र झा और सरोजिनी देवी ने बताया कि इंसानों से इंसान की  दूरिया इस कदर बढ़ा दी गयी है कि, लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो गये हैं।  बावजूद उनके गांव में दशकों से इस परम्परा को कायम रखा है।  खास कर मुहर्रम में जब ताजिया  उनके दरवाजे पर आता है, तो घर की महिलाएं विधिवत उसकी पूजा करते हैं। .

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