Sanmarg Live
Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, : Sanmarg Live, Morning India, Aawami News
BREAKING NEWS


{"effect":"slide-h","fontstyle":"bold","autoplay":"true","timer":"4000"}

एक मुस्लिम शासक भी रो पड़ा था, रामलीला देख कर

15

- sponsored -

- Sponsored -

इलाहाबाद की  ऐतिहासिक रामलीला में मर्यादा पुरूषोत्तम के वनवास का दर्द और राजा दशरथ के मृत्यु की व्यथा का प्रसंग देखकर बादशाह जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर की आंखे  बरबस ही “नम” हो गयीं।

- Sponsored -

- sponsored -

मुगल शासकों में अकबर ही एक ऐसा बादशाह था, जिसने हिन्दू मुस्लिम दोनों  संप्रदायों के बीच की दूरियां कम करने के लिए दीन-ए-इलाही नामक धर्म की  स्थापना की। अकबर के शासन का प्रभाव देश की कला एवं संस्कृति पर भी पड़ा।  उन्हें साहित्य में भी रुचि थी। उन्होंने अनेक संस्कृत पाण्डुलिपियों और  ग्रन्थों का फारसी में तथा फारसी ग्रन्थों का संस्कृत एवं हिन्दी में  अनुवाद भी करवाया था।

तत्कालीन नामचीन लेखक निजामुउद्दीन अहमद ने “तबकाते अकबरी” में इलाहाबाद की  रामलीला का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है “गंगा जमुनी” एकता के पैरोकार  बादशाह अकबर यहां आयोजित रामलीला में राम वनवास और पुत्र पीडा से व्यथित  राजा दशरथ की मृत्यु लीलाएं देख कर भावुक हो गये थे  और उनकी आंखे बरबस ही  नम हो गयीं थी। रामलीला के इस मार्मिक मंचन से बादशाह अकबर इतना प्रभावित  हुए कि उन्होंने विशेष फरमान जारी कर वर्तमान सूरजकुण्ड के निकट कमौरी नाथ  महादेव से लगे मैदान को रामलीला करने के लिए दे दिया था।

 

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored

- Sponsored -